
कुरुक्षेत्र अब कुरुक्षेत्र धाम बन गया है। ये घोषणा मुख्य मंत्री नायब सैनी ने की है। यह कार्य परम पूज्य एवं प्रातः स्मरणीय श्री समलंकृत जगद्गुरु त्रिपुरा पीठाधीश्वर चक्रवर्ती यज्ञ सम्राट श्री श्री 1008 हरिओम जी महाराज का कार्य राज राजेश्वरी मां भगवती त्रिपुरा सुंदरी की कृपा एवं अनुकंपा से सफल हुआ है।
कुरुक्षेत्र को कैसे मिला देशभर में प्रथम स्थान
मुख्यमंत्री ने बताया कि महाराज जी द्वारा कुरुक्षेत्र में किए 1008 कुंडिय शिव शक्ति महायज्ञ का पुण्य फल कुरुक्षेत्र के साथ साथ पूरे भारतवर्ष को मिला है। पूरे भारत में 1008 कुंडीय शिव शक्ति महायज्ञ को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक बताया और दावा किया कि कुरुक्षेत्र अब ऐतिहासिक स्थल के साथ-साथ आध्यात्मिक पवित्र स्थल के रूप में भी स्वीकार किया जाने लगा है।
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राष्ट्रहित मंच के अध्यक्ष क्या बोले ?
राष्ट्रहित मंच के अध्यक्ष पंडित परशुराम गौड़ ने आभार व्यक्त किया। इस महान यज्ञ के आयोजक और समाजसेवी पंडित परशुराम गौड़ ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र वह पवित्र भूमि है, जहां स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि यज्ञ और हवन कभी व्यर्थ नहीं जाते और इनके अच्छे परिणाम पूरे समाज को प्रभावित करते हैं।
क्या है उदेश्य ?
108 महायज्ञों में से 102 यज्ञ संपन्न हो चुके हैं। पंडित परशुराम गौड़ ने कहा कि महाराज जी के मन में जो 108 महायज्ञ थे, उनमें से 102 अब तक संपन्न हो चुके हैं। यह एक महान और दिव्य आध्यात्मिक खोज है जिसका उद्देश्य विश्व को लाभ पहुंचाना और सनातन धर्म की गरिमा को बढ़ाना है। उन्होंने इस अभियान को आधार बनाने के लिए मुख्यमंत्री के प्रयास की सराहना की।
धार्मिक मूल्य में कैसे हुई वृद्धि ?
आखिरकार, कुरुक्षेत्र को आध्यात्मिक स्थल के रूप में स्वीकार किए जाने से इसकी पवित्रता और धार्मिक मूल्य में काफी वृद्धि हुई है। इसके अलावा, 17 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय यज्ञ दिवस को और अधिक मजबूत बनाने के आह्वान को भी समर्थन मिल रहा है। धार्मिक दृष्टि से यह विकल्प अत्यंत महत्वपूर्ण है, साथ ही इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। इससे कुरुक्षेत्र को न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में आध्यात्मिक केंद्र के रूप में बढ़ावा मिलेगा।