
देश भर में बढ़ती Heat wave की संभावना को देखते हुए, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (NDMA) ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के साथ मिलकर योजना बनाई कि गर्मी की लहर का सामना कैसे किया जाए। इस चर्चा में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।
Heat wave से तापमान में बढ़ोतरी
Heat wave को लेकर IMD के वैज्ञानिक लगातार लोगो को जागरूक कर रहे है। IMD के वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने इस साल मार्च से मई तक औसत से अधिक तापमान बढ़ने का अनुमान लगाया है। 2023 की तुलना में अधिक गर्मी की लहर वाले दिन आने की उम्मीद है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि सबसे कम तापमान के दौरान भी गर्मी महसूस की जाएगी, जो सामान्य से भी अधिक है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2023 में देखी गई गर्मी की लहरों से होने वाली मौतों में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके अलावा 2023 वैश्विक जलवायु जोखिम सूचकांक रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित दस देशों में से एक है।
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हीट स्ट्रोक से बचाव की रणनीति
एनडीएमए अधिकारियों ने सभी राज्यों को हीट वेव एक्शन प्लान लागू करने का निर्देश दिया था। इस प्रस्ताव के माध्यम से:
अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के उपचार के लिए स्थान बनाए जाएंगे।
1: एम्बुलेंस में हीट स्ट्रोक पीड़ितों के लिए बिल्ट-इन सुविधाएँ होंगी।
2 : हीट स्ट्रोक के मामले स्वास्थ्य कर्मचारियों को दिए जाने वाले विशेष प्रशिक्षण का हिस्सा होंगे।
3 :मजदूरों और मनरेगा कर्मियों के काम के घंटे बदलेंगे।
4: बच्चों को बाहर की तपती धूप से बचाने के लिए स्कूल के समय में बदलाव किया जाएगा।
स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सुरक्षा उपाय
एनसीडीसी के आगे के निदेशक डॉ आकाश श्रीवास्तव ने कहा कि हीट वेव की घटनाओं से निपटने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना विकसित की गई है। इस कार्यक्रम के लिए:
1: सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
2: सभी अस्पतालों में कूलिंग मशीनें लगाई जाएंगी।
3 : हीट वेव से जुड़ी परियोजनाओं के प्रबंधन के लिए हीट नोडल के प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी।
निष्कर्ष
सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने गर्मी के बढ़ते खतरे को देखते हुए हीट वेव को कम करने की तैयारी में बहुत मेहनत की है। हीट स्ट्रोक से बचने के लिए लोगों को आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। पेशेवरों का तर्क है कि हीटवेव जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण को लागू करना होगा।