
राजधानी Shimla Airport पर सोमवार सुबह बड़ा हादसा टल गया। दिल्ली से शिमला आ रही एलायंस एयर की एटीआर फ्लाइट लैंडिंग के समय अस्थिर हो गई। रनवे पर उम्मीद से अधिक दूर उतरने के कारण पायलट ने अंत में इमरजेंसी ब्रेक का इस्तेमाल किया। यात्री डर गए, लेकिन पायलट की सूझबूझ से हादसा टल गया। विमान में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और अन्य यात्री सवार थे।
यात्रियों में दहशत
विमान की इमरजेंसी ब्रेक लगाने से अफरातफरी मच गई। एलायंस एयर ने तकनीकी समस्या का हवाला देते हुए घटना के एक सप्ताह बाद धर्मशाला की अगली यात्रा रद्द कर दी। इसके अलावा सुरक्षा कारणों से अन्य उड़ानें स्थगित कर दी गई थीं, जिससे यात्रियों को काफी असुविधा हुई।
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Shimla Airport पर चुनौतियां
Shimla Airport (जुब्बड़हट्टी) का रनवे 1200 मीटर लंबा है। इसे भारत के सबसे छोटे और सबसे खतरनाक एयरपोर्ट में से एक माना जाता है। पहाड़ी जमीन और छोटे रनवे के कारण लैंडिंग और टेकऑफ़ के लिए अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता होती है।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के अनुसार, देश के 80% छोटे हवाई अड्डों के रनवे 1800 मीटर से कम लंबे हैं, जिससे हवाई यातायात नियंत्रण में मुश्किलें आती हैं। शिमला एयरपोर्ट पर पहले भी कई बार विमान संतुलन की समस्या आ चुकी है।
एलायंस एयर की उड़ानों का प्रभाव
एलायंस एयर दिल्ली-शिमला-धर्मशाला-कुल्लू मार्ग पर उड़ानें प्रदान करता है। विमान अक्सर सुबह दिल्ली से रवाना होता था और शिमला से धर्मशाला और कुल्लू के लिए उड़ान भरता था। मगर आज की घटना के बाद एलायंस एयर ने और उड़ानें रोक दीं। एयरलाइन के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पहाड़ी इलाकों में छोटे हवाई अड्डों पर बेहतर लैंडिंग सिस्टम होना चाहिए।
नतीजा
एक बार फिर, शिमला एयरपोर्ट पर हुई यह घटना छोटे रनवे और यांत्रिक समस्याओं की और ध्यान दिलवाती है। । भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार और एयरलाइंस को बेहतर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की ज़रूरत है। इसके लिए बेहतर बुनियादी ढांचे और नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।