
बढती गर्मी को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बड़ी तैयारियां की हैं, जिसकी शुरुआत 27 मार्च से नई दिल्ली में होगी। गर्म हवाओं और लू की बढ़ती संभावना के कारण स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी है।
तापमान में लगातार हो रही वृद्धि
भारत का तापमान पहले ही 35 से 40 डिग्री के ऊपर पहुंच चुका है और मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में गर्मी का प्रकोप और बढ़ सकता है। इसको देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को सलाह दी है कि वे अस्पतालों में आइस पैक, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन, तरल पदार्थ, ओआरएस और अन्य जरूरी मेडिकल आइटम की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
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बढती गर्मी को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश
एक पत्र में स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को कई महत्वपूर्ण कदम उठाने का सुझाव दिया है:
अस्पतालों में हीट स्ट्रोक के उपचार के लिए दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।
1 मार्च, 2025 से शुरू होने वाले एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) पर, हीट स्ट्रोक के रोगियों के डेटा की दैनिक निगरानी और रिपोर्ट की जानी चाहिए।
स्वास्थ्य पेशेवरों का प्रशिक्षण – जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत आभासी प्रशिक्षण सत्र स्थापित किए गए हैं। राज्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता, चिकित्सा अधिकारी और डॉक्टरों को पर्याप्त प्रशिक्षण मिले।
एक जन जागरूकता प्रयास – बढती गर्मी से बचाव की तकनीकों, हीट थकावट के लक्षणों और प्राथमिक उपचार के बारे में आबादी को सूचित करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
हीट स्ट्रोक से बचने के लिए महत्वपूर्ण सलाह
स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों को निर्जलीकरण और हीट स्ट्रोक को रोकने में मदद करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
दोपहर से शाम चार बजे तक धूप में बाहर जाने से बचें।
PCK हल्के, ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें।
पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लें।
छायादार इलाकों में रहें और शरीर को ठंडा करने के लिए ओआरएस का इस्तेमाल करें।
अगर आपको बहुत ज़्यादा गर्मी लगे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
हीट वेव गर्मी के महीनों में स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा जोखिम पैदा कर सकती हैं। इस स्थिति में, राज्य सरकारों और आम जनता दोनों को गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए सतर्क रहना चाहिए। निश्चित रूप से स्वास्थ्य मंत्रालय की ये गतिविधियाँ गर्मी की लहर से जुड़े खतरों को कम करने में मदद करेंगी।