
हरियाणा की मिनी राजधानी Panchkula को राज्य के सबसे विकसित इलाकों में गिना जाता है, यहां के जिला अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं नहीं हैं। इस कमी के कारण मरीजों को अक्सर चंडीगढ़ के पीजीआई और दूसरे बड़े अस्पतालों में जाना पड़ता है। अब सवाल यह है कि सरकार की स्वास्थ्य नीतियां इस समस्या को दूर कैसे करेगी
विधायक चंद्रमोहन ने क्यों उठाई मांग ?
पंचकूला के विधायक चंद्रमोहन ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से खुलकर पूछा कि चंडीगढ़ से पंचकूला के नजदीक होने के बावजूद जिला अस्पताल सिर्फ रेफर सेंटर क्यों बन गया है। उन्होंने सरकार से इस बारे में जबाब माँगा कि मरीजों को लगातार दूसरे अस्पताल में क्यों भेजना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि 2022-23 से लेकर अब तक रेफर किए गए मरीजों की संख्या और अस्पताल के जीर्णोद्धार की योजना के बारे में जानकारी मांगी। तो सरकार की तरफ से सदन में कहा गया कि सरकार ने कहा कि ऐसी कोई नीति नहीं है।
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Panchkula के लोगों का लगा झटका
Panchkula के लोगों की लंबे समय से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल खोलने की मांग थी मगर सरकार के इस स्पष्ट बयान को देखते हुए पंचकूला के लोग परेशान हो सकते हैं। हालांकि पंचकूला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल है, लेकिन इसके निवासियों को स्वास्थ्य सेवा के लिए चंडीगढ़ पर निर्भर रहना पड़ता है। पंचकूला की बढ़ती आबादी को देखते हुए पेशेवरों का तर्क है कि वहां सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की तत्काल मांग है।
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा ?
सरकार का पक्ष रखते हुए स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि पंचकूला अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी सेंटर बनाने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। उन्होंने जो आंकड़े पेश किए, वे इस प्रकार हैं: 1 जनवरी 2022 से फरवरी 2025 तक 31,28,677 मरीजों ने ओपीडी सेवाओं का लाभ उठाया। वहीं, 4,66,274 मरीजों को आईपीडी में लाया गया और उन्हें देखभाल प्रदान की गई। सेक्टर-32 मेडिकल कॉलेज, चंडीगढ़ में रेफर किए गए मरीजों की संख्या 4385 थी। 2689 मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ में अपॉइंटमेंट मिला। 11 मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजा गया।