
भारतीय Farmers यूनियन (अंबावता) ने देशभर के किसानों के अधिकारों और विशेषाधिकारों पर बड़ा बयान जारी किया है। 20 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘किसान बचाओ, संविधान बचाओ’ रैली होगी। यह प्रदर्शन किसानों की अभी भी लंबित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए है।
Farmers क्यों करेगे प्रदर्शन ?
Farmers लंबे समय से अपनी बुनियादी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, ये कहना है भाकियू (अ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषिपाल अंबावता का ,उन्होंने कहा कि सरकार उनकी लगातार अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है।दिल्ली आंदोलन के दौरान 750 से अधिक किसान मारे गए, लेकिन उनके योगदान का कभी सम्मान नहीं किया गया। हालांकि कानून अभी तक पारित नहीं हुआ है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एमएसपी की गारंटी देने का वादा किया है।
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किसानों का कर्ज बकाया है और सरकार चुप
स्मार्ट मीटर किसानों के लिए नुकसानदेह हैं, जिसका काफी विरोध हो रहा है। इकबालपुर चीनी मिल पर किसानों का लाखों रुपये बकाया है, फिर भी सरकार कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को मामले से अवगत करा दिया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों को टोल टैक्स में मदद नहीं मिल रही है।
रैली की तैयारी जोरों पर
भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चौधरी (अ) ने कहा कि किसानों की यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। देश के कई राज्यों में जाकर संगठन के पदाधिकारी किसानों को इस मुहिम में शामिल होने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
उत्तराखंड से भी बड़ी संख्या में शामिल होगे किसान
उत्तराखंड के किसान भी मार्च में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चौधरी ने कहा कि अब समय आ गया है कि किसान एकजुट होकर अपनी बात कहें। सरकार को किसानों की मांगें पूरी करनी चाहिए।
आगे क्या होगा?
20 मार्च को हजारों किसान दिल्ली में जुटेंगे और सरकार से अपना हक मांगेंगे। अगर सरकार किसानों की अनदेखी करती रही तो किसान अपनी लड़ाई और तेज करेंगे। किसानों की यह लड़ाई अपने अधिकारों से आगे बढ़कर देश के संविधान और लोकतांत्रिक आदर्शों की रक्षा की भी है।