
बेंगलुरु में सुबह से ही हंगामा मचा हुआ है। ED ने अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस की संस्था ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (ओएसएफ) और उससे जुड़े अन्य ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत चल रही एक बड़ी जांच का हिस्सा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईडी न केवल अपने से जुड़े कुछ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों की जांच कर रही है, बल्कि कथित तौर पर फंडिंग में अनियमितताओं के लिए उनकी जांच भी कर रही है।
ED ने क्यों की छापेमारी ?
ED के सूत्रों के अनुसार इसकी वजह विदेशी धन और उसका इस्तेमाल करने के तरीके हैं। आरोप है कि ओएसएफ ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के जरिए बड़ी मात्रा में पैसा भारत में लाया और फिर उसे कुछ संगठनों में बांट दिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। आरोप है कि इन फंड का इस्तेमाल जिस तरह से किया गया, वह फेमा नियमों के खिलाफ था। यानी पैसा बाहर से आया, लेकिन उसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया। फिलहाल ईडी इस बात की जानकारी जुटाने में लगी है कि आखिर ये सारा पैसा कहां गया और इसका मकसद क्या था।
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जॉर्ज सोरोस कौन हैं?
अब जॉर्ज सोरोस के बारे में थोड़ी बात करते हैं। हो सकता है कि आपने इस शख्स के बारे में पहले भी सुना हो। यह अमेरिकी अरबपति, जिन्होंने हंगरी में जन्मा था, एक सफल व्यापारी और समाजसेवक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने 1999 में ओएसएफ नामक संगठन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य विश्व भर में मानवाधिकार, लोकतंत्र और सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा देना है। उनका संगठन कई बार भारत में समाचारों में रहा है। कुछ लोगों का यह मानना है कि सोरोस और उनकी संस्था भारत के हितों के विरुद्ध गतिविधियां करती हैं। खास तौर पर अडानी-हिंडनबर्ग मामले के दौरान उनका नाम काफी चर्चा में रहा था। तब भी इस बात को लेकर कई सवाल उठे थे कि क्या वे भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
अब तक क्या हुआ?
ईडी के अधिकारी सुबह से ही बेंगलुरु में OSF के दफ्तर और इससे जुड़े परिसरों की तलाशी ले रहे हैं। इस छापेमारी के तहत कुछ मानवाधिकार संगठनों के दफ्तरों की भी तलाशी ली गई है। सूत्रों ने पुष्टि की है कि ईडी ने महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्राप्त किए हैं, जो इस फंडिंग की कहानी को स्पष्ट करेंगे। फिर भी, ओएसएफ से अभी तक कोई शब्द नहीं मिला है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में क्या खुलासे होते हैं।