
भिवानी ( अमन ) मौजूदा समाज में जहां डिजिटल तकनीक और सिस्टम हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं, वहीं उनके अंदर की कई गलतियां ने सिस्टम की खामिया उजागर की है। भिवानी में सिस्टम की गलती से परिवार पहचान पत्र में साढ़े चार साल के बच्चे की आमदनी तीन लाख रूपये वार्षिक दर्ज की गई। जिससे देख प्रशासनिक अधिकारी हैरान रह गए.
सिस्टम की खामिया कैसे हुई उजागर ?
सिस्टम की खामिया बाहर आना कोई नहीं बात नहीं है। भिवानी के लघु सचिवालय में चल रहे समाधान शिविर के दौरान ऐसी ही एक अजीबोगरीब घटना देख डिप्टी कमिश्नर महावीर कौशिक भी हैरान रह गए। शहर के धोबी तालाब मोहल्ले में रहने वाली ओमवती नामक विधवा ने डीसी के सामने अपनी समस्या रखी। ओमवती का कहना है कि उसकी फैमिली आईडी में परिवार की सालाना कुल आय करीब 6 से 8 लाख रुपये दर्ज है। चौंकाने वाली बात यह है कि शिवम के साढ़े चार साल के बेटे की आय 1.80 लाख से लेकर तीन लाख रुपए के बीच दर्ज की गई जबकि उनकी 6 साल की बेटी की 1.40 लाख से 1.80 लाख दर्ज की गई है .अब साढ़े चार साल का बच्चा इतनी कमाई कैसे कर सकता है? यह सवाल हर उस व्यक्ति के मन में उठेगा जो इस स्थिति के बारे में जानेगा।
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डीसी ने दिखाई सख्ती , सुधार के दिए निर्देश
डीसी महावीर कौशिक ने ओमवती की शिकायत को गंभीरता से लिया। उन्होंने क्रीड विभाग के कर्मचारियों को सख्त आदेश जारी करते हुए कहा कि ये गलतियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। डीसी ने तर्क दिया कि इन नंबरों को तुरंत मैनुअल वेरिफिकेशन करके ठीक किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी गलतियों के लिए सिर्फ तकनीकी समस्याओं को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, इनके पीछे जानबूझकर की गई हेराफेरी को भी नकारा नहीं जा सकता।
सीएससी संचालकों पर होगी कार्रवाई
डीसी ने यह भी चेतावनी दी कि अगर परिवार की आईडी में आय या किसी अन्य जानकारी के बारे में जानबूझकर छेड़छाड़ की गई तो इसके लिए जिम्मेदार सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) संचालकों पर सख्त जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि ऐसी लापरवाही से न सिर्फ आम लोगों को परेशानी होती है बल्कि वे सरकार से मिलने वाली मदद से भी वंचित रह जाते हैं।
गंभीर मसला
यह समस्या सिर्फ एक विधवा और उसके परिवार तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि ऐसे कितने लोगों के परिवार पहचान पत्र में ऐसी गलतियां हो सकती हैं। अगर जानबूझकर ऐसी गलतियां की गई हैं तो इसके पीछे क्या वजह हो सकती है? परिवार पहचान पत्र ओमवती जैसे लोगों के लिए पहचान और सरकारी मदद का जरिया है, लेकिन ये गलतियां उन्हें उनके अधिकारों से वंचित कर रही हैं।
उम्मीद की किरण
ओमवती को उम्मीद है कि डीसी की मौजूदा सख्त नीति और त्वरित कार्रवाई के आदेशों की बदौलत उनकी समस्या का जल्द समाधान हो जाएगा। साथ ही, ऐसी समस्याओं से जूझ रहे सभी लोगों को यहां राहत मिली है। देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता और खुले तौर पर काम करता है।