
चंडीगढ़, हरियाणा की भाजपा सरकार ने विकास कार्यों के लिए बजट में बहुत कम राशि रखी है। कांग्रेस महासचिव और सिरसा की सांसद कुमारी शैलजा ने इस बजट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य के बजट का करीब 50 फीसदी हिस्सा ब्याज भुगतान में जाता है। इसके बाद बची हुई राशि का 70 फीसदी हिस्सा salary और सामाजिक पेंशन के भुगतान में खर्च हो जाता है। ऐसे में विकास कार्यों के लिए बजट में बची राशि कम है।
Salary और पेंशन में जाता है बजट का बड़ा हिस्सा
हरियाणा सरकार ने 2.05 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। इस बजट में से:
35,788.78 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने में खर्च किए जाएंगे।
26,331 करोड़ रुपये ब्याज चुकाने में खर्च किए जाएंगे।
41,672 करोड़ रुपये सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर खर्च किए जाएंगे।
पेंशन के लिए 27,162 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
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विकास कार्यो के लिए धन आभाव
विकास कार्यों के लिए अपर्याप्त धनराशि सरकार का आरोप है कि वह बजट का 32.84% हिस्सा सामाजिक सेवाओं के लिए आवंटित कर रही है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
शिक्षा: 10.39%
सामाजिक कल्याण: 9.67%
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण: 4.72%
सार्वजनिक स्वास्थ्य: 2.40%
इसके अलावा बजट का 21.53% हिस्सा आर्थिक सेवाओं के लिए जा रहा है। इसमें भी सबसे ज्यादा पैसा कृषि क्षेत्र (10.67%) को दिया जा रहा है। परिवहन, हवाई संपर्क और सड़क-पुल निर्माण पर सिर्फ 3.70% खर्च हो रहा है और ग्रामीण विकास के लिए 3.61% हिस्सा आरक्षित किया गया है। इससे साबित होता है कि सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से निवेश कर रही है।
क्या विकास कार्य रुक जाएंगे?
कुमारी शैलजा ने बताया कि अगर विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट नहीं होगा तो सरकार की घोषणाओं का क्या होगा? एक बजट से दूसरे बजट में योजनाएं लटकती रहती हैं, जिससे आम आदमी को उनका लाभ समय पर नहीं मिल पाता।
सरकार को यह बात रखनी चाहिए कि जब लोग सरकार से सड़क, अस्पताल, शिक्षा और अन्य बुनियादी ढांचे के बारे में पूछते हैं तो फंड कहां से आएगा?
बढ़ता कर्ज का बोझ और सरकार की प्राथमिकताएं
हरियाणा सरकार का कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार:
सरकार पर पहले से ही 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है।
वर्ष 2023-24 में कर्ज चुकाने के लिए 35,788 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
इसका मतलब है कि सरकार की प्राथमिकताएं कर्ज चुकाना, वेतन और पेंशन हैं, जबकि नई विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन कम उपलब्ध हैं।
क्या हरियाणा का विकास प्रभावित होगा?
Salary, पेंशन और ब्याज चुकाने में सरकार के बजट का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाएगा तो नई परियोजनाओं के लिए घाटा होगा। इसका बुनियादी ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा। सरकार को राजस्व सृजन के नए स्रोत तलाशने चाहिए