
जयपुर एयरपोर्ट पर गुरुवार सुबह राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की टीम ने सोने की तस्करी के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया। एयर अरेबिया की फ्लाइट से आए एक यात्री से अधिकारियों ने 70 लाख रुपये कीमत का सोना बरामद किया। टीम ने तस्कर के जानकार अजय फगड़िया को भी हिरासत में लिया है। उससे कई अहम जानकारियां मिलने की उम्मीद है।
तस्कर को किस तरह पकड़ा गया?
डीआरआई को पहले ही आगाह कर दिया गया था कि सऊदी अरब की राजधानी रियाद से जयपुर में उतरने वाली फ्लाइट में सोने की तस्करी की जा रही है। विमान के जयपुर एयरपोर्ट पर उतरते ही अधिकारियों ने तुरंत सतर्कता बढ़ा दी। टीम ने संदिग्ध यात्री को रोका और सभी यात्रियों के उतरने के बाद उसकी तलाशी ली, लेकिन उसमें कोई संदिग्ध बात नहीं मिली। फिर भी यात्री का व्यवहार अधिकारियों को पसंद नहीं आया और उन्होंने उसे पूछताछ के लिए अलग कर दिया। लगातार सवालों के जवाब देते हुए डीआरआई ने घबराते हुए एक्स-रे कराने के लिए कोर्ट से मंजूरी मांगी। जांच में पता चला कि संदिग्ध ने अपने गुप्तांग में पेस्ट जैसा सोना छिपा रखा था। 772 ग्राम वजनी इस सोने की बाजार में कीमत करीब 70 लाख रुपये है।
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जयपुर एयरपोर्ट तस्करी के पीछे कौन है मास्टरमाइंड?
पुरे मामले में कौन है मास्टरमाइंड? तो आरोपी ने इसका खुलासा करते हुए कहा कि अजय फगड़िया इस पूरी योजना का मास्टरमाइंड है। डीआरआई टीम के सदस्यों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अजय को भी पकड़ लिया। सूत्रों ने दावा किया कि अजय फगड़िया राजस्थान के सीकर और नागौर के गांवों से सोने की तस्करी के काम में मदद के लिए युवाओं को भर्ती करता था। हर यात्रा के लिए वह उन्हें 10,000 से 20,000 रुपये तक की रकम देता था। खुफिया एजेंसियां अजय पर कड़ी नजर रख रही थीं, जो काफी समय से इस अवैध धंधे में शामिल था।
आगे क्या होगा?
डीआरआई टीम असल में पूरे नेटवर्क की जांच पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह गिरोह और किसके साथ काम करता था और अब तक कितनी ड्रग तस्करी की गतिविधियों को अंजाम दिया गया है। अजय फगड़िया और उसके सहयोगी की गिरफ्तारी से सोने की तस्करी के कई और मामले उजागर होने की संभावना है।
संक्षेप में, जयपुर एयरपोर्ट पर हुई घटना से पता चलता है कि भारत में सोने की तस्करी कितनी बढ़ गई है। पारंपरिक तरीकों से हटकर, तस्कर आजकल सोने की तस्करी के लिए परिष्कृत और अपरंपरागत तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। फिर भी, डीआरआई और कस्टम विभाग इन अवैध गतिविधियों से लड़ने में निरंतर काम कर रहे हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तस्करी का यह अभियान कितना आगे तक जाएगा और इस स्थिति में और कौन से नाम सामने आएंगे।