
नूंह जिले के पिनगवां कस्बे में इरफान खान की शादी के चर्चे हर जगह सुनाई दे रहे है। दूल्हा बनकर जब इरफान खान हेलिकॉप्टर में दुल्हन को लेने पहुंचा । हेलिकॉप्टर में दुल्हन को घर तक ले जाने में सिर्फ 10 मिनट लगे। दूल्हे की दस मिनट की उड़ान में 7 लाख रुपये से अधिक खर्च हुए। दूल्हे इरफान खान यह उसके दादा की अंतिम पूरी करने के लिए किया।
दादा की अंतिम इच्छा बनी शादी की शान
दादा की अंतिम के बारे में दूल्हे इरफान खान ने बताया की उनकी इच्छा थी कि मेरे पोते की शादी धूमधाम से हो , जिसे जमाना याद करे। दादा की खुशी के लिए ये सब कुछ किया है। उन्होंने कहा की दादा की बात पूरी करने और अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए यह तरीका चुना।
फरीदाबाद के गांव बड़खल निवासी सब्बीर खान ने बताया कि बेटे का मन था कि वह अपने दादा की इच्छा पूरी करने अपनी बारात हेलिकॉप्टर से लेकर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने बेटे की खुशी के लिए हेलिकॉप्टर बुक कर दिया। यह शादी 04 अप्रैल शुक्रवार को हुई है।
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हेलीकॉप्टर देख आया भीड़ हजूम
पिनगवां में हेलीकॉप्टर के उतरने के बाद दर्शकों का उत्साह देखते ही बनता था। इस खास उत्साह में हर कोई दौड़ता हुआ दिखाई दिया। हेलीकॉप्टर के साथ फोटो खिंचवाने के लिए हर कोई कतार में खड़ा था। शाम करीब 5 बजे हेलीकॉप्टर दुल्हन को लेकर उड़ा और महज 10 मिनट में फरीदाबाद के बड़खल गांव में उतर गया। अगर वे हाईवे से शुरू करते तो यह यात्रा करीब ढाई घंटे चलती।
दुल्हन बनी सुसरालवालों की नजर में बेटी
दुल्हन दसवीं पास है, ससुराल वालों की नजर में वह ‘बेटी’ है। इरफान की दुल्हन अबाना खान ने दसवीं पास की है। इरफान के पिता ने देखा कि दुल्हन उन्हें बेटी जैसी लगती है। इसी तरह दुल्हन के परिवार ने एक एक्सयूवी महिंद्रा, 3 लाख रुपये नकद और कई अन्य सामान सहित दहेज दिया। दुल्हन के चचेरे भाई अनवर खान ने कहा, “अपनी बहन को हेलीकॉप्टर से विदाई देते हुए देखकर मेरा दिल गर्व से भर गया।” यह कुछ ऐसा है जो मैंने पहली बार देखा है।
हेलीकॉप्टर बढ़ता चलन
हरियाणा के सबसे पिछड़े जिलों में गिने जाने वाले मेवात ज़िले में पिछले कुछ समय से दुल्हन को हेलीकॉप्टर से लाने का चलन नूह और आस-पास के शहरों में तेजी से बढ़ा है। पहले, यह केवल शहरों में होता था; लेकिन अब ग्रामीण इलाकों में भी लोग अपनी शादी को खास बनाने के लिए लाखों खर्च करने से नहीं डरते। शादी में दो परिवार और कई ख्वाहिशें एक साथ जुड़ती हैं; जब बड़ों के सपने और बच्चों की खुशी का ख्याल रखा जाता है तो खर्च की परवाह कौन करता है?